थोड़ा और मिल जाता तो...  

Saturday, November 7, 2009

ह पश्चिम के किसी देश की बात है, जहाँ रोटियों की जगह आमतौर पर ब्रेड खाई जाती है। वहां एक व्यक़्ति रोज़ रेस्तरां जाता और ब्रेड के साथ सूप का ऑर्डर देता। रेस्तरां का मेनु तय था। वे लोग एक कटोरी सूप के साथ ब्रेड की चार स्लाइस देते थे। एक दिन मैनेजर ग्राहकों से रेस्तरां की सेवाओं के बारे में राय ले रहा था। उसने उस व्यक़्ति से पूछा, 'भाई साहब, आपका भोजन कैसा रहा?' उस व्यक़्ति ने जवाब दिया, 'अच्छा तो था, पर आपको ब्रेड की कुछ ज्यादा स्लाइस देनी चाहिए।' मैनेजर ने वेटर से अगले दिन से उसे चार की जगह छ्ह स्लाइस देने के लिये कह दिया।

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क़ीमत  

Sunday, October 4, 2009

एक दिन एक आदमी बाज़ार से गुज़र रहा था। वहाँ बड़ी भीड़-भाड़ थी, क़िस्म-क़िस्म की, ढ़ेर सारी दुकानें थीं। तभी उसने देखा कि एक जगह पांच-पांच सौ रुपए में पक्षी बिक रहे हैं और बहुत सारे लोग उन्हें बड़े शौक़ से खरीद भी रहे हैं। यह देखकर उसने सोचा कि जब ये छोटे-छोटे पक्षी इतनी बड़ी क़ीमत पर हाथों-हाथ बिक सकते हैं, तो उसके पास तो बड़े पक्षी हैं। उनकी तो दुगनी क़ीमत मिलनी चाहिए। यह विचार आते ही वह ख़ुशी-ख़ुशी घर की ओर चल पड़ा और वहाँ से अपने पालतू पक्षियों को लेकर बाज़ार पहुंच गया। वहां बिकते पक्षियों की बग़ल में वह अपना मजमा लगाकर बैठ गया और ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगा, 'बड़ा पक्षी आठ सौ रुपए में... बड़ा पक्षी आठ सौ रुपए में।' वैसे तो उसने अपने पक्षियों की हज़ार रुपए क़ीमत आंकी थी, पर उसे लगा कि शुरुआत में कुछ छूट देनी चाहिए, ताकि लोग जल्दी आकर्षित हों।

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एक ऐसी भूल जिसका मैं प्रायश्चित भी ना कर सका  

Sunday, September 13, 2009

स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर ख़ड़ी भीगती हुयी आँखों से रुख़सत करती हुयी वो मासूम सी लड़की जब तब मेरे ख्यालों में आ ही जाती है और मुझे एहसास करा जाती है मेरी उस भूल का जिस भूल के लिये आज तक मैं अपने आप को माफ़ नहीं कर पाया हूँ । उस दिन जब वो मुझसे मिलने स्टेशन पर आयी थी तो कितना खुश थी । उसने मेरे पास आकर मुस्कुराते हुये कहा था- अनुराग...मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ, मैं अपने दिल के जज़्बातों को आज तुम्हें बता देना चाहती हूँ... जिन्हें मैंने हमेशा तुमसे छुपा कर रखा । मुझे पता था कि वो मुझसे बे-इंतहा प्यार करती है पर मैं कभी उसे चाह कर भी प्यार नहीं कर पाया था । यही वजह थी कि मैं ये शहर हमेशा हमेशा के लिये छोड़ कर उसे बिना बताये जा रहा था । पर वो नादान इस समय इन सबसे अंजान अपने दिल की हर धड़कन जिस पर सिर्फ मेरा नाम लिखा हुआ था.. मुझे सुना देना चाह रही थी । मैंने उस समय बहुत बेरुखी के साथ उससे कहा था- महक... तुम्हारी फ़ालतु की बातों को सुनने के लिये मेरे पास वक़्त नहीं है, मेरी ट्रेन का समय हो गया है । पर शायद वक़्त इस स्टेशन को हमेशा के लिये हम दोनों के ज़हन में एक ना भूलने वाली याद के रूप में कैद करना चाहता था । मेरी ट्रेन 1 घंटे लेट हो चुकी थी... महक 1 घंटा और पाकर बेहद खुश थी । उसने मेरा हाथ अपने हाथों में लेकर कहा था- अनुराग... मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ और मैं जिन्दगी के आख़िरी लम्हों तक तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ.. क्या तुम भी मेरे साथ रहना पसन्द करोगे?..

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चाँद से गुज़ारिश  

Friday, August 28, 2009


ऐ चन्दा जा खिड़की से उन देख कर आ तो जरा,
महबूब मेरा सोया हैं या जगा,
मुझे ख़बर उसकी बतला तो जरा,
ऐ चन्दा जा खिड़की से उन देख कर आ तो जरा!!

मैं हूँ यहाँ, वो दूर है मुझसे,
इसलिए ही ये कहता हूँ तुझसे ,
थोडी सी रौशनी मेरे प्यार की,
उनके चेहरे पे बिखरा तो जरा,
ऐ चन्दा जा खिड़की से उन देख कर आ तो जरा!!!

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ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का  

Sunday, August 2, 2009


दोस्ती नाम है सुख-दुख के अफसाने का,
ये राज है सदा मुस्कुराने का,
ये पल दो पल की रिश्तेदारी नहीं,
ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का,
जिन्दगी में आकर कभी ना वापस जाने का,
ना जानें क्यों एक अजीब सी डोर में बन्ध जाने का,
इसमें होती नहीं हैं शर्तें,
ये तो नाम है खुद एक शर्त में बन्ध जाने का,
ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का
दोस्ती दर्द नहीं रोने रुलाने का,
ये तो अरमान है एक खुशी के आशियाने का,
इसे काँटा ना समझना कोई,
ये तो फूल है जिन्दगी की राहों को महकाने का,
ये तो फ़र्ज है उम्र भर निभाने का,

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पता ना चला  


सोचकर भी मुझको यकीं ना हुआ,
कैसे दोस्ती हो गयी उनसे पता ना चला,
कैसे चुपके से दिल में वो मेरे आ गयीं,
वो अजनबी से कब मेरी हो गयीं पता ना चला,

उनकी सूरत के चर्चे ज़माने में हैं,
पर उनकी शीरत ने मेरे दिल में घर कर लिया,
उनकी हँसी मेरे मन में कुछ इस तरह छा गयी,
कि मन्दिर की घंटियों का पता ना चला,
उनकी बातों में है कुछ नशा इस कदर,
कब हम मदहोश हो गये इसका पता ना चला,

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भिगोकर अश्कों से पलकें  


भिगोकर अश्कों से पलकों को बस यही फरियाद करते हैं,

तू भी उतना ही करती हो, जितना हम तुझे याद करते हैं,
दम तो मोहब्बत का उनकी,हम भी भरते हैं,
कहें कैसे बेकरारी से हर पल उनको याद हम भी करते हैं,

पलकों से अब अपने उनकी मोहब्बत उतार दी है,
कर करके याद उनको हमने जिन्दगी गुजार दी है,
वो सामने है जो साया कभी अपना कभी अनजाना सा लगता है,
गुजरे पल याद करता हूँ तो कुछ पहचाना सा लगता है,

करते रहेंगे हमेशा याद,कभी तो उन तक मेरी फरियाद जायेगी,
भूल जायें भले वो हमें,लेकिन कभी तो उन्हें मेरी याद आयेगी,
मेरे दिल पर मेरा नहीं उनका जोर चलता है,
यादों की धूप में उनकी आज भी दिल जलता है,

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