ओ कल्प -वृक्ष की सोन -जूही ओ अमल -ताश की अमर कली धरती के आताप से जलते मन पर छाई निर्मल बदली मैं तुमको मधु -शहद -गंध युक्त,संसार नही दे पाउँग...
कोई दीवाना कहता है
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है, मैं तुझसे दूर कैसा हुँ तू मुझसे दूर कैसी है ये मेरा दिल समझता ह...
नदी बोली समन्दर से
नदी बोली समन्दर से , मैं तेरे पास आई हूँ। मुझे भी गा मेरे शायर , मैं तेरी ही ही रुबाई हूँ।। मुझे ऊँचाइयों का वो अकेलापन ...
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती
लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती , कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती . नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है , चढ़ती दी...
आज तुम मेरे लिए हो
प्राण, कह दो, आज तुम मेरे लिए हो । मैं जगत के ताप से डरता नहीं अब, मैं समय के शाप से डरता नहीं अब, आज कुंतल छाँह मुझपर तुम किए हो प्राण, कह ...
मत कहो, आकाश में कुहरा घना है
मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है । सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से, क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है । इस सड़क...
बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं
बाढ़ की संभावनाएँ सामने हैं, और नदियों के किनारे घर बने हैं । चीड़-वन में आँधियों की बात मत कर, इन दरख्तों के बहुत नाज़ुक तने हैं । इस तरह टूटे...



